त्याग

              क्या? पैसाही सबकुछ है? क्या,पैसेसे सब मिलता है?क्या, आप पैसेसे सबकुछ खरीद सकते है?  इसका उत्तर सब जानते है। फिरभी आदमी हो या औरत सब पैसेके पिछे पडे है।पैसेकेलिए सब स्वार्थी बन गए है।पैसेसे सब झगडा है।

         कहते है, 'जड, जमीन और जोरु 'सबका नाश करती है। यह सत्य है।नशा आदमीको बर्बाद कर देता है।जायदादका विवाद आपके प्रगतीके राहका रोडा बन सकता है।जमीनकेलिए लोग लढतेहै,झगडते है।और अंतमें दु:ख पाते है।परस्त्रीका छंद लगा तो आदमीका सर्वनाश होता है। यह तिनों ऐसी चिजे है,जिसका छंद सर्वनाशका कारण बनता है।फिरभी कुछ लोग यह सब पानेकेलिए पैसेके पिछे पडे है।

        क्या, जिंदगीमें बाई,बाटली,जमीन यही सब है?ईसकेलिए लोग दुसरोंकी घरोंमें आग लगा देते है ताकि अपना स्वार्थ पा सके।दुसरोंका कुछभी हो।सामनेवाला मरे या पंगू हो जाए,इससेकोई सरोकार नही होता।बस,अपना स्वार्थ पुरा हो जाए।क्या, यह सही है? अपने पास पैसा है,सबकुछ है ,फिरभी क्यो  इन्सान इतना कमजोर है? अपनी ईच्छाओपर विजय नही पा सकता?        हमारे महापुरुषोने हमारेलिए बहुत कुछ छोडा है।क्या छोडाहै ,यह जाननेकी जरुरत है।उनके विचार हमें योग्य राह दिखा सकते है।हमें जरुरत है उन महान लोगोंके महान विचारोंकी।<br>

         पैसेसे प्यार न करो यारो,इन्सानसे करो।

         भगवान और शैतानकी बात छोडकर      नफरतसे डरो

क्योकि भगवान और शैतानका इस दुनियामे पता नही।इन्सानके मनकी उपज है वह। सबका अंत है।एकदिन सबको जाना है।खाली हात हम आए,खाली हात हम मिठ्ठीमें मिल जायेंगे;फिर क्यों दुसरोको तकलिफ देना? क्या,फर्क पडता है,अगर दुसरोंको हम खुशी दे तो?यह दुनियाकी अनमोल चिज है ;लेकिन हमसे गलती होही जाती है।अपनोकेलिए हम दुसरोंका नुकसान करते है।क्योंकि उस वक्त समानताकी  दृष्टी हममें नही होती।उस दृष्टीको पानेके लिए हमे हमारे युगपुरुषोकी जिंदगीपर नजर डालनी होगी ।उन्होने अपनी जिंदगी दुसरोंकेलिए कैसे जी।

         एक और बात ,कुछ लोग शरीरकी तृष्णाके पिछे ऐसे लगे है जैसे वही उनकेलिए सबकुछ है। उन्हे यह कहता हू कि वहतो पलभरकी भूक मात्र है ;फिर उसके पिछे क्यो दौडना? और वह.ऐसी चीज है ,जिसके रास्तेपर दु:खही दु:ख खडे है।वह   तृष्णा कभी शांत नही होती।अंततक वह आदमीको बुलाती रहती है और आदमीका अंत बुरा करती है।इहलिए सब छंद कंट्रोलमें चाहिए और बुरी आदते,छंद तो बिल्कुल न चाहिए।

       क्या सही ,क्या बुरा यह जाननेकी,पहचाननेकी शक्ती स्वयंमें पैदा करना।आदमीको आदमी समझना मशीन नही।धंदा ऐसा करना जिसमें किसिका नुकसान न हो।समाजकी दृष्टीमें वह अच्छा और सही हो।हम सब इन्सान है इसलिए इन्सिनको इन्सान समझे।

            पैसेसे प्यार न करो इन्सानसे करो

        इन्सानियतसे करो,पुरी कायनातसे करो।