कच्ची उम्र

कच्ची उम्रका प्रेम प्रेम नही ,धोका है।एक प्रकार का आकर्षण है ,जो नैसर्गिक है।इस धरापर हर प्राणियोंमें दो जातीया है,यह सबको पता है।नर और मादा हमे हर प्राणियोंमे देखनेको मिलते है।कुछ जीव अपवादभी हो सकते है।

ईन्सान इस निसर्गकी एक अनुपम कलाकृति है।एक अद्भभूत उत्पत्ति है।

    प्रेम जात-पात ,रंग ,रुप, धन -दौलत रुतबा, देखकर नही होता।वह अपने आप हो जाता है।इसका एक उदाहरण मैं आज आपको बताउंगा।गौरसे पढियेगा और सिख भी लिजियेगा।

    एक छोटेसे गावमें एक छोटा सामान्य परिवार रहता था। अभीभी है। माँ-बाप और भाई-बहन बस इतनेही लोग परिवार में थे। उस परिवार के काफी रिश्तेदारभी उसी गावमे रहते थे।लडकीका नाम ज्वाला (बदला हुवा)था। उसके घर के समीप सतलसिंग का घर था। उसका एक बेटा था ,जो बहुतही काला था।उसका नाम सतेज था।ज्वाला और सतेज हमउम्र होनेके कारन स्कूलमे एकसाथ पढतें थे।एक साथ गावके स्कूलमें जाते थे ,तब वे छोटे थे ।ज्वाला सतेजको भैया बुलाती थी,यह बात सबको मालूम थी।दोऩों छोटे थे ।दोनोंकी जाती अलग थी।

      ज्वाला बहुतही कम बोलनेवाली लडकी थी।

     सतेजका परिवार बहुतही गरीब था।ज्वाला का भी परिवार जादा अमीर नही था ।उसका फादर पुजापाठका काम करता था।सतेजकी जब प्रायमरी शिक्षा पूर्ण हुई तब उसे आठवीमें दुसरे स्कूलमें दाखील करना पडा। एक साल बाद ज्वाला भी उस स्कूलमें दाखिल हुई।फिर सतेज तीन साल बाद वहाकी अपनी शिक्षा समाप्त कर पढाईकेलिए शहर जाने लगा तो ज्वाला भी पढाई के लिए शहर जाती थी ।

       अब दोनों काफी बडे हो चुके थे।अपना भला-बुरा समझते थे। रविवार छुट्टीका दिन। मतलब फुरसतका दिन ।घरमें कोई नही होता था।सतेजके घरमेंतो सिर्फ उसका बाप था।कुछ साल पहलेही उसकी माँ कँसर होनेके कारन गुजर गई थी।बाप सातो दिन दुसरोंकी खेतमें काम करने जाता था। ज्वाला के घरवाले भी घरमें कम होते थे।घर नजदीक होनेके कारन लडकीका सतेजके घर आनाजाना था ।यही बात और  कच्ची उम्र पताही नही चला की कौन किसके आकर्षण में पागल हो गया।ज्वाला का गोरा रंग और अच्छी सुरत सतेजकी आँखोंमें छा गई।ज्वाला सोलह सालकी आग मे कब बह गयी इस बातका खूद उसेही पता नही चला।जातपात की दिवारे उन दोनोंकेलिए कबकी ढह चुकी थी।लेकिन यह क्या दोनों तो प्यार करने लगे थे पर समाज और अपनोंका डर ,लोग क्या कहेंगे इस बातका डर दोनोंको लगने लगा।यह कच्ची उम्रका खेल था या सच्चा प्यार  ,वक्तने ऐसी करवट ली कि सबकुछ तबाह हो गया।

  ज्वाला की जवान खुबसुरती देख उसके रिश्तेदार उसके लिए रिश्ते लाने लगे।ज्वाला भी सच्चाई अपनी किसीको बता न सकी और एक दिन रिश्ताभी तय हो गया। तब उसने अपनी माँको बता दिया ।माँने उसे कहा ,"कलमुही ,वह न अपने जातका न पातका ।उस कालेमें तुने क्या देखा।अब मंगनीहो चुकी है ।हमारी ईज्जतका खयाल कर ।तुझे यह शादी करनीही होगी।"उस ज्वाला के मनके विरुध्द सब कुछ तय हुवा।ज्वाला ने कहा ,"शादी भी हो गयी तोभी मैं उनके घर न रहुंगी।उल्टे पाव वापस आउंगी।"सतेज बहुत कमजोर दिलवाला निकला ।जिस दिन ज्वाला की शादी हुई ,बारात चली गयी,उसी दिन इस महाशयने जहर खा लिया।कोई सोचा नही कि उसके बाद उसका बाप जब बुढा होंगा तब उसका क्या होगा।चार दिन तक अस्पताल में पडा रहा और पाचवे दिन उसने तडपते हुए अपनी जान छोड दी।ज्वाला तो उसे न मिलने आई और न उसे सतेजके बारेमें जानकारी दी गयी।

      जवानीके दहलीज पर यह कच्ची उम्रका प्यार अपनी मंजिल पा न सका।

इस कहानीसे आप समझ सकते है कि कुछ सबक ले।पहले आपको समझना होगा की आप जो कर रहे है ,वह प्यारही है ।कही वह वासना तो नही या केवल उम्रकी तो भूल नही?या केवल शारिरिक आकर्षण तो नही?तुम्हारे बिछडनेसे या करिब आनेसे कितना कुछ बदल सकता है। दोनोंके परिवार पर कितना असर पड सकता है ।जानकी जोखीमभी हो सकती है अथवा ऐसी नौबतभी आ सकती है।

    इसिलिए किसीभी बातको छुपाए नही ताकि बादमें सब आसान हो।

   प्यार एक इबादत है।उसे बदनाम ना करो।

कच्ची उम्रके प्यारसे हो सके तो डरो।

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