प्रेममें धोका

 

ऐसा प्रेम वास्तवमें प्रेम नही,जो उम्मीदसे किया हो।हमारे आसपास बहुत सारे उदाहरण मिलते है,,जिसमें सच्चा प्रेम नही होता।शुरुशुरुमें ऐसा लगता है कि अपना प्रेम सच्चा प्रेम है,किंतु वह एक सिर्फ आकर्षकण हो सकता है।इसलिए प्यार करनेवालेको सभी बातोंपर ध्यान देना आवश्यक है।

   प्रेम तो वह भाव है,जो हृदयसे उत्पन्न होता है और मृत्यु के दरवाजेपर समाप्त होता है।

     प्यार सभी करते है।कोई ईजहार कर पाता है और किसीके नसीबमें ईजहार करना नही होता। दुसरोंका या अपनोका प्रेम समझ पाना हर किसीके बसकी बात नही। उसकेलिए अपना स्वभाव का विशाल होना आवश्यक है।यह अपने मन या स्वभावपर निर्भर है। क्या आप गरम मिजाज़ हो? क्या आप क्षमाशिल हो ?क्या आप शांत भावके हो? क्या आप दुसरोंके प्रति संवेदनशील हो? क्या आप औरोंको किस तरहसे कैसे कितना तोलते हो।क्या आप अन्योंका मन समझनेकी ईच्छा रखते हो? यह बातें बहुतही महत्त्वपूर्ण है।तभीतो प्रेम करनेवाला प्रेमको समझेगा।मैं  आज एक उदाहरण अवश्य देना चाहूंगा, जिससे यह साबीत होगा कि उनका प्रेम वास्तवमें प्रेम नही था।आप जोभी इस बातको पढेगा,शायद एक सबक मिल जाए ।

    एक बहुतही सुंदर लडकी थी। उसने नर्सिंग का कोर्स किया हुवा था।उसे अपने हमउम्र लडकेसे दोस्ती हो गई।दोस्ती कब प्यारमें परिवर्तीत हो गयी पताही नही चला।फिर क्या?दोनो हवामें उडने लगे।प्रेममें इन्सान पागल हो जाता है, उसका दिमाग अच्छा-बुरा कम समझ पाता है।यहाँ भी वैसाही हुवा।

    दोनोने वादे-कस्मे खायी।जब दिन होता तो दोनो मौका मिलतेही एक दुसरेको मिलते।जी भरके अपनी प्यारकी बातें करते और रात होती तो रातके अंधेरेमें सोये-सोये सपनोंकी सैरमें खो जाते। ऐसा कुछ दिन चलता रहा,चलता रहा। इक दिन वही बात हो गयी जो अक्सर होती है, उनके प्यारकी भनक उनके घरवालोको लगी।पहले पहले तो कुछ हंगामा हुवा; पर दोनो साधारण घरके थे,अलबत्ता दोनोकी घरविलोंने उनकी शादीका फैसला किया।

    लडकीके जीद के आगे भाई मजबूर था।माँ- बाप को भी लगा की शादीतो करनीही है, हो जाने दो लडकीके मन जैसा।अपनी लाडलीसे वह बेपनाह प्रेम जो करते थे।दोनोकी शादी कर दी गयी।

      दोनो हसी खुशी रहने लगे पर घर छोटासा होनेके कारण दोनोने किरायेके मकानमें रहनेका फैसला किया और उसी इलाकेमें किरायेकी एक रुम ली। मौज-मजेमें दिन बितते गये।लडकीको जॉबभी लग गयी ।इस बीच घरमे एक नन्हासा मेहमान भी आ गया।दोनोके खुशीका ठिकाना न रहा।सबकुछ मस्त चल रहा था।इस बीच लडकीको एक अस्पताल में जॉबभी मिली।सब ऑलवेल था।हशी खुशी जिंदगी चल रही थी।

         लडकी अस्पतालमें नर्सका काम करती थी इसलिए उसे नाईट ड्यटीपेभी जाना पडता था।घरका कामभी संभालना पडता था।स्वभाव जादा टेशनकी वजहसे चिडचिडा बन रहा था।इसी बीच घरमें दुसरी नन्ही परीभी आ गयी। खुशीका माहोल घरमें वापस आया। कुछ दिन बाद लडकीने वापस ड्यूटी जॉईन की।काफी कुछ समय निकल गया।

       नर्सकी ड्यूटी होनेकी वजहसे काफी देर रात होने तक लडकी घर नही आ सकती थी।यही एक कारन परेशानीका सबब बन गयी।उसके पतीके स्वभावमें अचानक परिवर्तन हो गया । वह जराजरासी बातपर  उसे तंग करने लगा। दोनोमें नोक झोक होने लगी ।काफी कुछ बाते बिगडने लगी और अचानक एक दिन उसका पती    उसे छोडकर अपने मातापिताके घर चला गया। लडकीको काफी कुछ झेलना पडा।लडकी अकेली दोनो बच्चेको संभालने लगी ।उसकी जिंदगी अस्पतालकी ड्यूटी और अपने बच्चे इन दोनोमें सिमट गयी।

      कुछ दिनोके बाद लडकीको यह पता चला कि उसका पती एक औरतके साथ किराये एक मकानमें रहता है वह झल्ला उठी और दुसरेही दिन वह शामको उसके यहॉ जा पहुची।उसे काफी कुछ भलाबुरा कहने लगी।दोनोमें झगडा होने लगा।झगडा क्या अब तो मारपीट होने लगी।लडकेका भाई पासही रहता था ।वहभी अपने भाईका साथ देने लगा और दोनोंने मिलके लडकीको मारा। लडकी खूप  रोने लगी।रोते रोते पुलीसमें जानेकी धमकी देने लगी।

  एक हसता खेलता परिवार अपने शक और नासमझीकी वजहसे बिखर उम्मीद न रखे।प्यार करनाही है तो गरज या अपेक्षाको लेकर नही।दिल खोलके करो ;वर्ना उस रास्तेपर मत जावो।